बनारस के बुनकरों की कला को मिला नया आयाम, GI-टैग वाली साड़ियों के लिए Assi और Godowlia में खुलेंगे ट्रेंडी बुटीक आउटलेट
काशी की ऐतिहासिक हस्तशिल्प और बनारसी साड़ियों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक नई पहल की है। इसके तहत शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों के पास विशेष बुटीक स्थापित किए जाएंगे।
वाराणसी के हथकरघा उद्योग और पारंपरिक बुनकरों को आधुनिक बाजार से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार के वस्त्र विभाग ने मिलकर एक महत्वाकांक्षी योजना की रूपरेखा तैयार की है। इसके तहत अस्सी घाट, गोदौलिया और कैंट क्षेत्र के प्रमुख पर्यटक मार्गों पर अत्याधुनिक 'बनारसी हैंडलूम बुटीक' खोले जाएंगे, जहां पर्यटकों को सीधे मूल बुनकरों द्वारा तैयार की गई जीआई-टैग (Geographical Indication) प्रमाणित साड़ियां मिल सकेंगी।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना और सीधे बुनकरों को उनकी कला का उचित मूल्य दिलाना है। इन बुटीकों में आधुनिक इंटीरियर के साथ-साथ डिजिटल डिस्प्ले की भी व्यवस्था होगी, जिससे खरीदार साड़ियों की बुनाई के इतिहास और उससे जुड़ी कहानियों को क्यूआर कोड के जरिए जान सकेंगे। जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों का मानना है कि इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि विदेशी सैलानियों को भी मिलावट रहित असली बनारसी सिल्क खरीदने का भरोसा मिलेगा।
स्थानीय बुनकर संगठनों ने सरकार के इस कदम की सराहना की है। बुनकर संघ के अध्यक्ष ने कहा, 'यह कदम हमारी पीढ़ियों पुरानी विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ डिजिटल युग में हमें टिके रहने की ताकत देगा।' उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी देव दीपावली से पहले इन आउटलेट्स का संचालन शुरू कर दिया जाएगा, जिससे त्योहारी सीजन में पर्यटकों को एक नया खरीदारी अनुभव प्राप्त होगा।