काशी के हस्तशिल्प और संगीत में रची-बसी शादियां बनीं ट्रेंड, डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए देश-विदेश के जोड़ों की पहली पसंद बन रहा बनारस
शाही महलों की तर्ज पर अब देश-विदेश के जोड़े अपनी शादी के लिए शिव नगरी वाराणसी को चुन रहे हैं। गंगा के घाटों और पारंपरिक संगीत के बीच होने वाली ये डेस्टिनेशन वेडिंग्स सोशल मीडिया पर नया ट्रेंड बन गई हैं।
उत्तराखंड के पहाड़ों या राजस्थान के किलों से आगे निकलकर अब 'डेस्टिनेशन वेडिंग' के नक्शे पर उत्तर प्रदेश का वाराणसी (काशी) सबसे चमकता हुआ सितारा बनकर उभरा है। देश के महानगरों और एनआरआई जोड़ों के बीच अब काशी के ऐतिहासिक घाटों, क्रूज और गंगा उस पार रेत पर पारंपरिक रीति-रिवाजों से विवाह करने का भारी क्रेज देखा जा रहा है। बनारसी सिल्क की थीम, शहनाई की गूंज, पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और गंगा आरती के साक्ष्यों के बीच सात फेरे लेने का यह अनुभव अपने आप में अद्वितीय माना जा रहा है।
इस लाइफस्टाइल ट्रेंड को बढ़ावा देने में शहर के लग्जरी होटल्स, इवेंट प्लानर्स और बोट एसोसिएशन की बड़ी भूमिका है। हल्दी और मेहंदी के कार्यक्रमों के लिए पुरानी हवेलियों को गेंदे के फूलों और बनारसी दुपट्टों से सजाया जाता है, जिसमें मेहमानों को बनारसी पान, ठंडाई और कचौरी-जलेबी का पारंपरिक नाश्ता परोसा जाता है। संगीत संध्या में ठुमरी और कबीर गायकी का तड़का इस उत्सव में चार चांद लगा देता है।
मुंबई से आकर काशी में विवाह करने वाले एक जोड़े ने बताया, 'हमने गोवा और उदयपुर का विकल्प छोड़ा क्योंकि जो दिव्यता और आध्यात्मिक शांति हमें बनारस में मिली, वह दुनिया में कहीं और संभव नहीं थी।' इस बढ़ते ट्रेंड से न केवल स्थानीय इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों को रोजगार मिला है, बल्कि नाविकों, फूल विक्रेताओं और पारंपरिक कलाकारों की आय में भी जबरदस्त उछाल आया है।